यह एक शहर है

– सुशील कुमार

 

यह एक शहर है

मेरे सामने गुलमोहर के पेड़ पर फूल लदे हैं

पेड़ के चारों ओर कुछ चिडियाँ चहचहा रही हैं

उसके ठीक नीचे सड़क पर गाडियां सरपट दौड रही हैं

बगल के पेट्रोल पम्प पर अभी-अभी गाड़ी भरकर पेट्रोल उतरा है

मालूम नहीं यह तेल किस रिफायनरी से आया है

सरकार के या फिर अंबानी के ……..

पम्प के बगल में नारियल के पेड़ पर एक बाज बैठा है

कई घंटे से वह एक ही दिशा में सिर गडाए हुए है

उसके ठीक सामने……….

वो दूर कुछ इमारतें बन रही हैं

बहुत ऊंची, गगनचुम्बी

बाज की आँखें उसी दिशा में हैं

मेरी बायीं ओर शीशे की एक ऊंची इमारत है

उसके तीसरी मंजिल पर जैन फूड मिलता है

बिलकुल वेजिटेरियन

उसी इमारत के नीचे कई महँगी कारे खड़ी हैं

एक मेम अभी-अभी कार से नीचे उतरी

उन्होंने सड़क पर सोये कुत्ते के पैर पर अपनी कार चढ़ा दी

कुत्ता पो……पो ……. चिल्लाता दूर भाग गया

मेम वेज फूड खाने चली गयीं………

उसके ठीक नीचे ओर्गेनिक फ़ूड भी बिकता है

वे बड़े महंगे हैं……

एक बार मैं इस स्टोर में गया था

पैकेट में बंद मुट्ठी भर हरा धनिया सौ रुपये का था

मैंने भी एक बार गांव में पिताजी से ऐसी खेती करने की बात की थी

पिताजी बोले, ‘अरे बेवकूफ, दुनिया आगे भाग रही है और तू गोबर खाद की बात करता है

येसी खेती तो तेरे दादा जी करते थे’

खैर……….मैं खड़ा सोचता रहा……..

गांव की याद से खुद कों निकालकर शहर लाया

अचानक मेरी नाक में गमले के पौधे की ए़क पत्ती घुस गई

आछी…….आछी………..

यह भी ओर्गेनिक पौधा है

भाई……यह एक शहर है

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